स्वार्थी ही मूर्ख है

कुछ लोग अपनी ख़ुशी के लिए आपको आपकी साँस भी रोकने को कह सकते हैं। और कुछ लोग अपनी साँस रोक भी लें ऐसे लोगों के लिए। 

पहले वर्ग को 'स्वार्थी' कहते हैं..मगर फिर दूसरा वर्ग क्या है? आम भाषा में ऐसे लोगों को 'बेवकूफ' या 'मूर्ख' कहा जाता है। 

दुसरे वर्ग के लोगों को अगर किसी और को खुश कर के ख़ुशी मिलती है या फिर किसी और की ख़ुशी उनके लिए ज्यादा मायने रखती है, तो एक तरह से वो जो भी कर रहे हैं अपनी ख़ुशी के लिए ही कर रहे हैं ना..फिर वो मूर्ख कैसे हुए और स्वार्थी नहीं? 

स्वार्थी ही मूर्ख है या मूर्ख ही स्वार्थी है? 


सर्वाधिकार सुरक्षित
नादान 

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